छठ पूजा

छठपूजा

छठ पूजा सूर्य देवता या सूर्य देव और उनकी पत्नी देवी उषा की पूजा के लिए समर्पित है। यह एक महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार है जिसे मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में मनाया जाता है।

छठ पूजा

इस अवधि के दौरान, भक्त पृथ्वी को आशीर्वाद देने और पृथ्वी पर जीवन के समर्थन के लिए दिव्य जोड़े का शुक्रिया अदा करने के लिए पूजा करते हैं। इस साल की, छठ पूजा 11 नवंबर को शुरू होगी और 14 नवंबर को समाप्त होगी।

लोग एक कठोर दिनचर्या का पालन करके त्यौहार मनाते हैं जो चार दिन तक रहता है। इसमें 36 घंटे से अधिक समय तक उपवास किया जाता है बिना पानी पिये, इसके लिए भक्तों को जल निकाय में पवित्र स्नान करने की आवश्यकता होती है, और बढ़ते और सूरज की स्थापना के लिए प्रार्थनाएं प्रदान करती हैं।

क्यों मनाया जाता है छट का पर्व

एक मान्यता के अनुसार श्री राम और सीता माताने लंका में कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को व्रत रखा था विजय प्राप्त करने के बाद श्री राम और माता सीता ने छठ पूजा की थी। इसमें उन्होंने सूर्य देव की पूजा की थी। इस कारण छट पुजा की जाती है!

 

कार्तिक मास मे शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि

कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है। यह त्यौहार मूल रूप से बिहार,  झारखंड, नेपाल एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहुत जोशो उल्लास ओर धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व मे छठी माईं एवं सूर्य देवता की पूजा की जाती है। इस पर्व को चार दिन तक मनाया जाता है!

दीपावली के बाद मनाया जाता है यह पर्व

छठ पर्व दीपावली की अमावस्या के बाद मनाया जाता है, मुख्य रूप से यह त्यौहार भाई दूज के तीसरे दिन से शुरू होता है। शुक्ल की षष्ठी को यह पर्व मनाया जाता है इस कारण इसका नाम छठ पूजा पड़ा। इस दौरान व्रत रखने वाले लोग 36 घंटों तक उपवास रखते हैं।

नहाय-खाय की रस्म से शुरू होता छठ व्रत

छठ पूजा के व्रत की शुरूआत नहाय-खाय इस नाम की रस्म से होती है। व्रत शुरू होने के पहले दिन इसमें घर की साफ-सफाई करके घर को पवित्र किया जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले लोग शुद्ध शाकाहारी खाना बनाकर भोजन करते हैं। इस दिन व्रत करने वाले लोग कद्दू की सब्जी ओर  दाल-चावल खाते हैं।

खरना में बांटते हैं प्रसाद

कार्तिक मास की शुक्ल पंचमी को छठ पूजा व्रत का दूसरा दिन होता है। इस पूरे दिन उपवास रखा जाता है ओर शाम को खाना खाया जाता है। इस रस्म को खरना रस्म कहते हैं। इस रस्म मे अपने पड़ोसियों एवं जान-पहचान के लोगों को प्रसाद ग्रहण करने के लिए बुलाया जाता है।

नदी किनारे संध्या को देते हैं अर्घ्य

छठ पूजा

छठ पूजा व्रत का तीसरा दिन कार्तिक मास की छष्ठी को पड़ता है। शाम के समय वर्त करने वाले किसी नदी या तालाब में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। सूर्य देव को जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है।

नदी किनारे संध्या को देते हैं अर्घ्य

एक बांस के टोकरी में मैदे से बना हुआ ठेकुआ, मूली, चावल के लड्डू, गन्ना, व अन्य सब्जियों और फलों को रख दिया जाता है, इसको सूप कहते हैं। यह प्रसाद को अर्घ्य के बाद सूर्य देव और छठी माईं को अर्पण किया जाता है।

read more click hare

 

 

 

 

 

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *