योग

योग (yoga) – मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापिन केवल योग के द्वारा ही किया जा सकता है, देखा जाये तो योग एक सूक्ष्म विज्ञान है! योग ही स्वस्थ जीवन की कला और विज्ञान है !

योग शब्द की उत्पत्ति-

योग शब्द की उत्पत्ति वाड़्मय के अनुसार-  यूज् धातु में घञ् प्रत्यय लगने से निष्पन्न हुआ है!

पाणिनीय व्याकरण के अनुसार- यह तीन अर्थो में प्रयुक्त होता है,

1. यूज् समाधौ- समाधी

2. युजिर योग- जोड़

3. यूज् संयमने – सामंजस्य

आधुनिक वैज्ञानिको के अनुसार- ब्रह्माण्ड में जो भी उपलब्ध है वो सभी परमाणु का प्रकटीकरण मात्र है, योग से इनमे एकत्व का अनुभव किया जाता है!

योग का प्रयोग आंतरिक विज्ञान के रूप में किआ जाता है, योग में विभिन्न प्रक्रियाओ का सम्मेलन है, इन क्रियाओ के माध्यम से मनुष्य अपने मन और शरीर के मध्य सामान्यता स्थापित कर सकता है! योग का मुख्य उधेश्य सभी प्रकार के दुखो से मुक्ति प्राप्त कर सभी व्यक्ति के जीवन में पूर्ण स्वंत्रता और स्वस्थ, प्रसन्नता का अनुभव करवाना है!

योग का इतिहास-

योग की उत्पप्ति हजरों साल पहले हुई है श्रुति परम्परा के अनुसार योग विद्या के प्रथम गुरु भगवन शिव है हजारो-हजार सालो पूर्व कांति सरोवर झील के किनारे हिमालय पर आदियोगी (शिव) ने योग का ज्ञान पौराणिक सप्त ऋषियो को दिया था!

योग (yoga)

इसके बाद इन सप्त ऋषियों ने इस ज्ञान को विश्व के अलग अलग भागो में प्रसारित किआ! यह भारत भूमि है जहा पर योग विद्या सम्पूर्ण तरह से अभिव्यक्त हुई| भारतीय उपमहाद्वीप पर भ्रमण करने वाले सप्तऋषियों और अगस्त्य मुनि ने इस योग संस्कृति को जीवन के रूप में विश्व के प्रत्येक भाग में प्रसारित किया!

वर्तमान में सभी को विश्वास है की योग के माध्यम से व्याधियो की रोकथाम, अच्छी देखभाल और स्वस्थ लाभ की प्राप्ति की जा सकती है! सम्पूर्ण विश्व में लोग योग के द्वारा अनेक बीमारियों से छुटकारा प्राप्त कर रहे है, आज के समय में योग महत्वपूर्ण होता जा रहा है!

योग के आधार-

योग व्यक्ति के शारीरिक क्षमता, मन, भावनाए और उर्जा के स्तरके आधार पर कार्य करता है! इसे मुख्यतः 4 भागो में बाटा गया है-

योग में जिस भी प्रणाली की प्रयोग करते हे, ये सब आपस में जुडी हुई होती है

योग (yoga)
  • कर्मयोग- इसके अंतर्गत शरीर का प्रयोग किया जाता है!
  • ज्ञानयोग- इसमें मन का प्रयोग किया जाता है!
  • भक्तियोग- इसके अंदर भावना का प्रयोग किया जाता है!
  • क्रियायोग- क्रियायोग में उर्जा का प्रयोग करते है!

योग अभ्यास के सामान्य दिशा निर्देश-

योग करते समय कुछ विशेष निर्देशों का पालन करना आवशयक है जो की निम्न प्रकार है-

अभ्यास से पूर्व:-

 

  • शौच- शौच का अर्थ होता है शोधन, योग करने से पूर्व की यह महत्व पूर्ण क्रिया है, जिसके अंदर आस-पास का वातावरण, शरीर और मन की शुद्धी की जाती है
  • योग करने का स्थान शांत होना चाहिए, शरीर और मन को शिथिल कर योग करे!
  • योग हमेसा खाली पेट या अल्पाहार (bearkfast) ले कर करना चाहिए!
  • योग करते समय मल और मूत्र का वेग धारण नही करना चाहिए!
  • योग करने के लिए जमीन पर चटाई, दरी, या योग मैट का प्रयोग बिछाने के लिए करे!
  • अभ्यास करते समय शरीर की गतिविधिया आसानी से हो इसके लिए सूती और हलके, आरामदायक वस्त्र पहनने चाहिए!
  • थकावट, बीमारी, जल्दबाजी और तनाव की स्थति में कभी योग नही करना चाहिए!

for more information click here

2 thoughts on “क्या है योग का सत्य !”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *